सत्ता के हस्तांतरण की संधि (Transfer of Power Agreement)
भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित
किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से
संबोधित किया जायेगा। हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में
ये इंडिया है। संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is
Bharat " जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन
दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया। ये इसी संधि के
शर्तों में से एक है। अब हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी
भारत नहीं है।
Transfer of Power और Independence ये दो अलग चीजे है। स्वतंत्रता और
सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है। और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है
? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये,
दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ
ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर
करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने
वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर
की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए
प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर
चला जाता है।
यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे, लार्ड
माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह
दिया कि स्वराज्य आ गया। कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के
लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ?
ये भी समझ लीजिये। अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों
ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत
पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे। ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या)
था और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया और
इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और पाकिस्तान
नामक दो Dominion States बनाये गए हैं। ये Dominion State का अर्थ हिंदी
में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और
भारत के सन्दर्भ में इसका असल अर्थ भी यही है। अंग्रेजी में इसका एक अर्थ
है "One of the self-governing nations in the British Commonwealth" और दूसरा "Dominance or power through legal authority "।
Dominion
State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है। मतलब सीधा
है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं।
दुःख तो ये होता है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे
या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास में इस संधि को मान लिया या कहें
जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया और ये जो तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून
अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence
Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस देश की
आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा
गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे, वो नोआखाली में थे
और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए
आप। गाँधी जी ने मना कर दिया था। क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता
नहीं कि कोई आजादी आ रही है और गाँधी जी ने स्पष्ट कह दिया था कि ये आजादी
नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है और गाँधी जी ने
नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही
वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये
सन्देश देना चाहता हु कि ये जो तथाकथित आजादी (So Called Freedom) आ रही है
ये मै नहीं लाया। ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में
फंस कर लाये है। मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है और 14 अगस्त
1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे। माने भारत की
राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव
रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था। क्यों ?
इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे। (नोआखाली के दंगे तो एक
बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात
को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई .... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट
लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में।
अब शर्तों की
बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण
शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है
.....
इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के
अधीन/मातहत ही हैं। वो एक शब्द आप सब सुनते हैं न Commonwealth Nations.
अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा
ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है। ये Commonwealth का मतलब होता
है समान सम्पति, किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति। आप
जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी
भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो Commonwealth
में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को
वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही है लेकिन
भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की
जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं। मतलब इसका निकाले तो
ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी
ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत
नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त 1947 को हमारी आज़ादी की
बात कही जाती है वो झूठ है और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है
वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में।
इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की
सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं, लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती
है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली
बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस
निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे
भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम
नागरिक नहीं है। ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र
देश में रह रहे हैं। एक शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों
का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं
कहा जाता। एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ....... हमारे यहाँ के
अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं - (ब्रिटेन की
महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं)
प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब तो वो हैं
नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है।
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History of India

